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जुरगुड़ा खोरठा कविता संग्रह JURGUDA KHORTHA KAVITA SANGRAH

संपादक कर कलमे.....  
अइसे खोरठा शिष्ट साहित के तीन काल खंडे बांटल गेल हे आदिकाल (1700 से 1850 तइक), मइध काल (1850 से 1920 तइक) आर आधुनिक काल (1920 से एखन तइक) आधुनिक कालो के तीन उपखंडे बांटल गेल हे। नवजुग पानुरी जुग (1920 से 1980) पुनर्जागरण काल झा जुग (1980 से 2000) आर विकास काल (2000 से एखन तइक)।
                पइत काल के देश कर राजनीतिक परिस्थिति सबले बेसी परभावित करो हे, एकर अलावे समाजिक स्थितियो करो हे। मुलतः साहित समाज कर आड़सी लागे। साहितकार समाजेक घटित घटना के देखो हे, आर जे अनुभव करे हे ओकरे ऊ साहित कर कोन्हो विधाञ उखरवो हे। ई बात साहित संग हर काले पावल जाहे।
खोरठा शिष्ट साहित लिखेक परंपरा भले देइर पुरना हे मेंतुक सही माने में देखल जाइ त खोरठा में साहित लिखेक बेसी गति पावल हे 1980 कर बाद से। एकर पाछु राँची विश्वविद्यालय में जनजातीय एंव क्षेत्रीय भासाक पढ़ाइ सुरू हवेक ।
खोरठा में संपादित कविता संकलन छपवेक परंपरा शिवनाथ प्रमाणिक जी 1984 में करल हथ। जे 'रूसल पुटुस' छपवल रहथ। दुसर संतोष कुमार महतो जी 'एक पथिया डोंगल महुआ' 1990 में छपवल रहथ। आर तेसर रमणिका गुप्ता जी 'बोनेक बोल' 1994 में छपवल हथ। ई तीनों किताब पुनर्जागरण काल में उभरल कवि सब कर कविता संकलित हे। एकर बादे नाञ...... पर हामे चउथा संकलन छपवेक उता- सुता सोचलों आर नावा लिखवइया सब कर रचना के संकलन
करेक परयास करलों ई 'जुरगुड़ा' कविता संकलन में हाम 2000 कर बादे पोंगल आर गाछ बनल लिखवइया के लेल हिये। ताकी खोरठा परेमी ई नाञ बुझे की खोरठा साहित लरूवाइ लागल हे। झारखंड बनल बादे आर खोरठा पढ़ल लोक जकर में देइर डिग्री धारीयों हथ। ओखिन कर सोंच के हामिन बुझे पारब काहे कि एखिन त खोरठा साहित के नावा मुकाम दिये पारता। बाकी तोहिन कर हांथे होन ई 'जुरगुड़ा'।
ई कविताक गोछ के बनवे में दिनेश कुमार दिनमणि आर डॉ. गजाधर महतो प्रभाकर जी करे कहल परे ई काम हवे पारल हे, उनखाक हाम आभार हियेन। एकर संगे हामर माँय-बाप, दादा-भउजी, दीदी-बोहनइ, बहु बेटी, भगीना- भगीनीक ढेइर सहजोग हे इनखरो हाम आभार करहियेन। ई संकलित कविताक किताबेक लेताइरे आपन-आपन बिचार जरूरे देबाइ ताकि आवे संकलन में सुधार करे पारब। संपादक  संदीप कुमार महतो।