एकेडमी के अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि समाज में किसी न किसी को आगे आकर साहित्यिक परंपरा को मजबूत करना होगा ताकि रामदयाल मुंडा और बिशेश्वर केसरी जैसे विद्वानों के सपनों को आगे बढ़ाया जा सके। समारोह में उपाध्यक्ष बीरबल महतो और सचिव डॉ. सबिता केसरी ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गीत से हुई। इस अवसर पर ओलचिकी और वारांगचीति लिपि के विकास में योगदान के लिए रघुनाथ मुर्मू और लाको बोदरा के परिजनों को सम्मानित किया गया।
साथ ही नौ भाषाओं की चयनित पुस्तकों के रचनाकारों को “साहित्य शिखर सम्मान” प्रदान किया गया। सम्मानित साहित्यकारों में कुड़ुख से डॉ. नारायण उरांव, संताली से सुन्दर टुडू, हो भाषा से काशराय कूदादा, खड़िया से डॉ. इग्नेशिया टोप्पो, मुंडारी से डॉ. मनसिद्ध बडॉयूद, खोरठा से डॉ. चितरंजन महतो ‘चित्रा’, नागपुरी से क्षितिश कुमार राय, कुड़माली से डॉ. चंद्र मोहन महतो तथा पंचपरगनिया से दीनबंधु महतो शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सबिता केसरी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार ने दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 25 वर्षों के अंतराल के बावजूद अब तक सरकारी स्तर पर भाषा एकेडमी का गठन नहीं हो पाया है, जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
समारोह में विभिन्न भाषाओं के समन्वयकों ने एकेडमी को और बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में डॉ. गजाधर महतो, डॉ. रतन महतो सत्यार्थी, डॉ. सरस्वती गगराई, डॉ. डुमनी मुर्मू, डॉ. पार्वती मुंडू, डॉ. संदीप कुमार महतो, कमलेश कुमार, डॉ. जयमंगल, सुकेशी कुमारी, शोधार्थी विकी कुमार, नेहा कुमारी, खोरठा की छात्रा शोभा कुमारी, सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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