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खोरठा भासाक विकासें भिनु-भिनु जाइतेक जोगदान !

भासा, जाइत, धरम, लोक संस्कीरति सद एके नाय हवे। जाइत, धरम आर विचार (दर्शन) संे बोड़ दायरा हवे हे भासा के। एगो भासा जे जाइत के दायरा तोइड़ कें पसरे हे ओकर में भिनु-भिनु विचार के लोक सामाइ जा हथ आर सब रकमेंक रचना धरमि लोक आपन आचार-विचार सें रचना कर-हथ मेनेक भासा सभेक एके रहे। जे रंग संस्कृत के देव भासा कहल जा हे, माने बाभनेक भासा मेंतुक ओहे संस्कृत में एक ले एक बाभन बिरोधि आर बेद बिरोधि रचनाओ भेल हे, बृहस्पति के चारवाक सूत्र एकर उदाहरन हे। 
दुनियाँइ ओहे भासा समरिध मानल जा हे जकर में भिनु-भिनु विचारेक साहित रचना भेल हइ, माने ऊ भासा में सभे रकम बोलवइया हथ। 

हमर खोरठा भासा में देखा, खाली छपल किताबेक सूची टा देइख लेलें ई भरम टा दूर हवे पारे। खोरठा भासाँइ लिखवइयाक मइधें :-

बाभन --- भुवनेश्वर दत्त शर्मा ’ब्याकुल’, डाॅ0 ए0के0झा, शेखर गंवार, शिवनंदन पाण्डेय ’गरीब’, बहादूर पाण्डेय ’झिंगफुलिया,विनय कुमार तिवारी, भवप्रितानंद ओझा...)

मुसलमान --- तितकी राय, असद अलि खाँ, मो0 सिराज उद्दीन अंसारी ’सिराज’,प्यारे हुसैन ’प्यारे’, मोमेरा बेगम, इम्तियाज गदर, नइमुद्दीन.......) 

 कुरमी --- (डा0 बी0एन0 ओहदार, श्याम सुन्दर महतो ’श्याम’, चितरंजन महतो ’चित्रा’, धनपत महतो, डाॅ0 गजाधर महतो ’प्रमाकर, फुलचंद महता,े रामटहल ओहदार..गौतम महतो, 

 गोस्वामी--- (किरती गोसांई, जनार्दन गोस्वामी ’ब्यथित’, डाॅ0 महेन्द्र नाथ गोस्वामी ’सुधाकर’, मनपुरन गोस्वामी, मणिलाल ’मणि’, देबुलाल गोस्वामी, प्रयाग चंद्र गोस्वामी,अनिल कुमार गोस्वामी, गिरिधारी गोस्वामी ’आकाश खूँटी’....), 

पनेरी ---श्रीनिवास पानुरी, अर्जुन पानुरी,

 केवट ---श्याम सुंदर केवट।

कोयरी ---अकलु राम महतो, डाॅ0 बिनोद कुमार, कुमारी शशि, डा. आनंद किशोर दांगी, फल्गुनि मरिक कुशवाहा, रविन्द्र कुशवाहा...।

भुमिहार ---प्रो0 नरेश नीलकमल, परेश निर्भय।

 तेली---शांति भारत, बंशी लाल ’बंशी’, डाॅ0 चतुर्भुज साहु, नारायण महतो.।

 कुम्हार --- संतोष कुमार महतो, पारितोष कुमार प्रजापति, पंचम महतो, दिनेश दिनमणि, डाॅ0 नागेश्वर महतो, अम्बुज कुमार.।

नोउआ --- शिवनाथ प्रमाणिक, 

लोहार---रामशरण विश्वकर्मा, सुकुमार, प्रदीप कुमार ’दीपक’.।

 मुची ---कृष्ण चंद्र दास ’आला’, प्रलाद चंद्र दास.।
 
भाठ --- विश्वनाथ दसौंधि ’राज’, जयप्रकाश दसौंधि, विकास चंद्र महाराज।

 रवानी---विश्वनाथ प्रसाद नागर।

ेकाइस्त ---गीता वर्मा।

कमार ---फुतेश्वर करमाली, डाॅ अर्चना कुमारी।

संथाली ---हीरालाल सोरेन।

एकर छाड़ा कइयेक रचनाकार के जाइत पता नाय जाने पइलों आर कइयेक नाम छुटे पारे।
 
हिंयाँ हमर मतलब ई देखवेक हे जे खोरठा भासाक विकासें नाना जाइतेक आर धरमेक लोकेक जोगदान हइ, एतने नाय एकर मइधें नाना विचारेक रचना कइर खोरठा साहितेक भंडार भोरल हथ आर भासाक समरिध करल हथ। एक बाट डाॅ0 ए0 के झा जीक रकम नास्तिक आर कम्युनिष्ट तो दोसर बाट माय काली के परम भगत आर तांत्रिक विश्वनाथ दसौंधि ’राज’ आर प्रो0 नरेश निलकमल, बाभनबादेक बिरोधि मनपुरन गोस्वामी तो ’ईशावास्योपनिषद्’ के अनुवाद करे वाला मणिलाल मणि आ भगवत गीता के अनुवाद करे वाला मनमोहन पाठक। 
इटा मने राखा जे खोरठा भासा ओकरे जे खोरठा बइजके, लिखे आर बेबहार करे, आर ऊ कोन समुदार सें आवे हे, की ओकर बिचार हे उटा ककरो नीजि मामला हवे पारे। सइ लेल जखन भासाक विकासेक बात हवे तखन बाकी दोसर विचार गुला कटि धाइर कइर दियेक चाहि।
                                                  -’आकाश खूँटी’ संपादक: ’लुआठी’
                                       संपर्क :8987415287