घोड़ा लोक नृत्य
भारतेक झारखंड राइजे एगो परिया - परिया से लोक नाच ढेइर परचल हे - घोड़ा लोक नाच । झारखंडे अइसन ढेइर पारंपरिक लोक नाच
कला हे, जेकर आबगा सवंये ठीक नाय हे । कुछेक कला अइसनो हे, जे सिराय जाय रहल
हे ,ओकरे मे एगो घोड़ा लोक नाच । झारखंडे घोड़ा नाच कर नामे जानल जा हे । एकर छाड़ा दोसरो राइजे - राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात , पश्चिम बंगाल आरो - आरो ठेकाने करल जा हय ।
ई नाचे घोड़ा नियर एगो बांसेक बनावल जाहे , जेकर बिचे खाली रहय । ओकरे मे एगो लोक समाइल रहे हे । जे सोचे हे की हाम एगो घोड़ा मे सवार हीये । एहे लोक नाचे वाला हवे हे । जे नकली घोड़ा सवार कइरके नाचे हे
। ई नाच मुइख रूपे बीर रसेक नाच लागय मनतुक एकरा हांसी
- खुसी बनवेक खातिर सिंगार रस आरो दोसरो रस के मेसावल गेल हय जेकर से बेस आर देखे जोइग बने हे ।
घोड़ा लोक नाच परियाक कथा अनुसारे एकर जनम
- जखन राजा - महाराजा लड़े खातिर जा हला ओहे सवंय ई नाच घोड़ा मे सवार होय के जते सेना रहे हे सभे लोक लड़े खातिर जा हथ तखन आपन गाते एगो चेठगर , हुबगर आर खुसी
भरे खातिर करथ आर संगे बिजय पायके
घर / राज दुवाइर घुइर के आवथ
तखन सेना सब जीतेक खुसी घोड़ाञ सवार होय के ढेइर खुसी हुबेक संगे नाचले गावले पहुंचो हथ । एहे खातिरे एकर नाम घोड़ा लोक नाच राखल गेलय । मुइख रूपे देखल जाय त ई नाच के घर
आवेक आर जायेक सवंये करल जाहे । कुल मिलायके कहल जाय त डहरे
चलेक सवंये करल जा हलय । मकीन सवंयेक संगे
- संगे कहनी मे बदइल जाय रहल । एखन त बिहा सादी मे जखन बोर
घार ले बहरा हे आर कनिञांय घार पहुंचे हे
तखन ई नाच करल जाय रहल हे । जखन एकरा नाच सैली मे लियल गेल तखन से एकरा एगो कहनी कर मोहड़ा देल गेलय । जे कहनी दु राजाक बिचे गीत-
नाच सैलीक माध्यमे खुब जोरगर
लड़ाय हवे हलय , ई लड़ाय एगो नचनी के पावेक खातिर - एकर मे कहनी हय की एगो नचनी के दुगो राजा मे पसींद कर हथ आर दुइयो राजा ओकरा अपनावे खोइज हथ आपन नचनी बनवेक खातिर
। नचनीयो कोन्हो कम नाय ढेइर बेस आर हिया के
मोही लियेक । हाम्हु केकरो से कम नाय ही ।जखन नाचेवालाञ आपन नचनी बनवेक खातिर अड़ी गेल रहथ । तखन नचनी कर मगजे नाय
कोन्हो ।भाबना करय की आब हाम केकर संगे जाब । तखन दुइयो राजाक मांझे एगो सरत राखही । जे हामरा नाची के खुस करथ हाम ओकरे संगे जीबय । तखने दुइयो राजा आपना आपन नाच के पारी पारी देखवे लागोहथ । मांझे त घमासान नाचेक झगरा चले लागे । आर त आर नचनी के खुस करे खातिर दुइयो राजाञ गीत नाच संगीत सुर ताल बा आपन भाव देखवे मे घमासान झगरा चले हे , जे नाच देखे मे जोस आर
हुबे मन के ढेइर खुस करवऽहथ । अंते दुइयो थइक जा हथ ।तखन नचनी दुइयो राजाके छोइड़ के दोसर गांव चइल जा हथ ।
अकसर ई नाच मुइख रूपें झारखंडेक बोड़ बोड़ परब तिहारे , जातरा , मेला , बा कोन्हो खुसीक सवंये जइसे - छठीयारी , मुहजुठीये करल जा हय । आपनो से भी करवल जा हय । एखन त बिहा करे जाहथ । तखन बोर बाबुक आगु आगु बीरेक नियर नाचते गावते चलऽहथ मांझे कलाकार सब आर तकर पाछु बोर बाबु जाहथ ।
अइसने सभे अवसरे समाजिक आर बेबसायिक दुइयो रकमेक ई सांसकिरतिक नाच के करल जाहथ । ई झारखंडेक कय
परिया से चलइते आय रहल हे तकर कोन्हो खाइस ठोर ठेकान कर साड़ा एखन तइक नाय मिलल हे ।
ई भावे देखल जाय त एकरा बचावेक , बिकास करवेक बा परचावेक काम करवेक ढेइर जउरत हय ।आर नाय ई नाच रसे - रसे सिराय जाइत एकर मे कोन्हो दु मत नेखय ।
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