• लोकगीत दू सबदेक मेल से बनल हे लोक आर गीत।
• लोकगीत लोक रचित आर लोकेक खातिर रचल गीत के लोकगीत कहल जाहे ।
• देखल जाय त खोरठा लोक साहित ही एकर सिष्ट साहित कर जनक हे ।
• खोरठा लोकगीत ही खोरठा छेतर कर पहचान लागे ।
2. परिभासा :-
लोकगीतेक परिभासा भिनु भिनु विदुवान सभे आपन आपन मत आर बिचार देल हथ -
• राल्फ विलियन्स कर मते खोरठा में - "लोकगीत ना पुरना हेवहे आर ना नावा । ई त ऊ जंगली गाछ नीयर हेव हे जकर जइर अतीतेक गहराइ में घुसल रहेहे मेंतुक ओकर डाइरें रोज नावां पतइ फूल आर फर आव हइ।
• परसिध्द लोक साहित्यकार श्री सुर्यकरण पारीक कर विचार - "आदिम मनुष्य हृदय के गानों का नाम लोकगीत है।"
3. खोरठा लोकगीतेक बिसेसता
• खोरठा लोकगीत खोरठा भासा भासीक एगो जिनगीक आधार लागे , लोक दिन राइत खेते गठे काम कइर के आवो हथ आर आपन थकान मिटवे खातिर लोकगीत गावो हथ ।
• एकर में अश्लीलताक अभाव रहे हे संगें परकिरतिक भिनु भिनु छटा देखे मिले हे।
• ई बेयाकरन आर भासा बिगियान से छुट रहे हे।
• खोरठा लोकगीत हियांक परब तिहारेक मुइख आधार हे ।
4. खोरठा लोकगीतेक बाँटा-खुँटा
डॉ. गजाधर महतो प्रभाकर जीक मते खोरठा लोकगीतेक बाँटा-खुँटा ई नीयर हे -
• संस्कार गीत
• करम परबेक गीत
• सोहराइ परबेक गीत
• बॉउड़ी परबेक गीत
• बारह मसीया गीत
शिवनाथ प्रमाणिक जीक मते - संस्कार संबंधी,ऋतु संबंधी, प्रकृति विषयक, पर्व-त्यौहार संबंधी, व्रत संबंधी ,सहियारी (मित्रता) संबंधी आर विविध ।
5. (क) संस्कार गीत
ई गीतेक भीतरे जनम आर बिहाक मइधे जते नेग - जोग हे, तते गीत पावल जाहे।
एगो बिदाइ गीत देखल जाक -
बापा कांदे घरे बइसी
मइया कांदे दूलाइरे बइसी
अबे बेटी......
6 . (ख) परबेक गीत
झारखण्डे खोरठा छेतरें करम सोहराइ कर बड़ा माइन हे । हिञा जते परब तते गीत गावल जाहे। खोरठा छेतरें ई गाइ गोरूक परब कांहु कारतिक मासे त कांहु पुस मासे मनवल जाहे । सोहराइ गीत देखल जाक -
ओही रे , खोजा-खोजइते गेलीये पुछा-पुछइते गेलीये रे
बाबु हो , कोंदे हइ जे अहिरा के घरा हो
कारी गइया ......
7. (ग) रीझ रंगेक गीत :
खोरठा छेतरें रिझ-रंगेक एगो अलगे ठांव दियल गेल हे। ई कोन्हो हुब - हुलासेक, परब-तिहार बा बिसेस अवसरे गावल जाहे एकरा सिंगारिक गीतों कहल गेल हे।
आवा एगो रिझ - रंगेक गीत देखब -
फूले साजल अंगना हांथे सोभइ कंगना
रसें रे रसें पिया नाइच उठल मनवाँ
रसें रे रसें .......
8. (घ) उदासी गीत :-
उधवा / उदासी / आसाढ़ी गीत , ई खाइस कइर के वियोग सिंगारेक गीत लागे । आवा एगो उदासी गीत देखल जाइ :-
कहां से आइल भंउरा, कहां चली गेल रे
अरे भंउरा कहां काटले निसी राइत रे
भोरे झरलइ .....
9. (ङ) कामेक गीत :-
झारखंडेक मुइख पुंजी हे काम । लोक आपन में खेत- बारी काम करइते किसानी गीत गाव हथ । एकर में रोपनी कटनी गीतें सामिल हे । जे ई नीयर एगो गीत देखल जाइ पारे -
टांड़ी बुनबइ दाना , खेते रोपबइ धाना एहो
दुइब धाने धरती सोहान, हम बनब किसान
अन पानी जीवेकेरी जान ......
(च) विविध गीत : खोरठा लोकगीतें विविध लोकगीत पावाइल जाहे , जे नीयर - सिक्छा , नसाबंदी, झूला गीत , बांदर खेलवा आर छउवा गीत । पटतइर रूपे एगो सिक्छा गीत देखल जाक -
पिया पढ़े नाञ छोड़िहा
झलफले उठी खनी
नीम दोतइन लोटे पानी....
10. सारांश :
ई नियर कहल जाइ पारे की जे कोन्हों हुब हुलास, बिहा-सादी , छठी,परब- तिहार, करम ,सोहराइ बंउड़ी जातरा बा कोन्हों सुख दुखेक बेराञ कंठ ले आपन आपरूपी गीत बहराइ जाहे । एतने नाञ लोक जखन कामेक पहर बा काम कइर के थकल खातीर लोक गोठाइ के गीत झुमइर गाइ के आपन थकान के मेटवे हथ । आर ई अइसने पीढ़ी दर पीढ़ी चलइत रहे हे । एकर संरक्षण आर संवर्धन करेक जउरत हे काहे की लोकगीतेक महातम लोक जिनगीयें ढांगा ओसाइर हइ।
संदीप कुमार
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