"मैं हूँ झारखण्ड" के लेखक देव कुमार ने गृह मंत्री को भेजा पत्र
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रांची : झारखण्ड की लोकभाषाओं को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए "मैं हूँ झारखण्ड" पुस्तक के लेखक एवं शोधकर्ता देव कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र भेजकर राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल में खोरठा, कुड़माली एवं पंचपरगनिया भाषाओं के गीत, साहित्य एवं लोककलाओं को शामिल करने का अनुरोध किया है।
अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि झारखण्ड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बावजूद इन समृद्ध लोकभाषाओं को अब तक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल में स्थान नहीं मिला है। जबकि इन भाषाओं में समृद्ध साहित्य, लोकगीत, लोकनृत्य तथा सांस्कृतिक विरासत मौजूद है और बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं लोक कलाकार सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
देव कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल में इन भाषाओं को शामिल किए जाने से खोरठा, कुड़माली एवं पंचपरगनिया भाषा के साहित्यकारों, लोक कलाकारों एवं सांस्कृतिक कर्मियों के लिए पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे झारखण्ड की भाषाई और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने गृह मंत्रालय से इन भाषाओं को राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल में शामिल कर झारखण्ड के साहित्यकारों और कलाकारों को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने का समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।
ज्ञात हो कि देव कुमार झारखण्ड के चर्चित लेखक एवं शोधकर्ता हैं। उनकी पुस्तक "मैं हूँ झारखण्ड" प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है। वहीं उनकी महत्वपूर्ण कृति "बिरहोर–हिंदी–अंग्रेजी शब्दकोश" शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की भारतवाणी परियोजना में शामिल की जा चुकी है। भाषा, साहित्य एवं जनजातीय संस्कृति के क्षेत्र में उनके कार्यों को व्यापक सराहना मिली है।
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